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Tuesday, May 15, 2012

डा. प्रीत अरोड़ा सम्मानित


13 मई को मदर्स ड़े के उपलक्ष्य में अमर उजाला अखबार की ओर से एक प्रतियोगिता “ एक पैगाम माँ के नाम ” आयोजित की गई थी , जिसमें 700 कविताओं की एंट्री पहुँची,उसमें से 20 सर्वोत्तम कविताओं का चुनाव किया गया l 

इस  अवसर पर  प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया जिसमें ड़ा प्रीत अरोड़ा की कविता माँ एक मधुर एहसास को भी शामिल किया गया था l 

यह कार्यक्रम जीरकपुर के कन्फर्ट बैंक्वेट हाल में किया गया l 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चंड़ीगढ़ प्रशासक के एड़वाइजर के के शर्मा की पत्नी एनवी शर्मा शमिल हुईं,इसके साथ ही साथ अमर उजाला के कार्यकारी _संपादक उदय कुमार ,फिल्म कलाकार ड़ा दीप्ति शर्मा और रिच एंड _न्यूट्रीशन खाना-खजाना एवं कुकरी एक्सपर्ट सरिता खुराना आदि ने भी कार्यक्रम में शिरकत की l

(जीरक पुर से रपट )


Monday, April 30, 2012

हिंदी ब्लॉगिंग को समाज की बुराईयों से बचाने की जरूरत


 रविवार, 29 अप्रैल, 2012 

 इस मौके पर हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के प्रभाव के सबने एकमत से स्‍वीकारा।


भारत की राजधानी के दिल कनॉट प्‍लेस के द एम्‍बेसी रेस्‍तरां में एक हिंदी ब्‍लॉगर संगोष्‍ठी लखनऊ से पधारे हिन्‍दी के मशहूर ब्‍लॉगर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी के सम्‍मान में सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़डॉटकॉम के तत्‍वावधान में शनिवार को आयोजित की गई।


इस मौके पर हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के प्रभाव के सबने एकमत से स्‍वीकारा। देश विदेश में हिंदी के प्रचार प्रसार में हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के महत्‍व को सबने स्‍वीकार किया और इसकी उन्‍नति के मार्ग में आने वाली कठिनाईयों पर व्‍यापक रूप से विचार विमर्श किया गया। संगोष्‍ठी में दिल्‍ली, नोएडा, गाजियाबाद के जाने माने हिंदी ब्‍लॉगरों से शिरकत की।सोशल मीडिया यथा फेसबुक, ट्विटर को हिंदी ब्‍लॉगिंग का पूरक माना गया। एक मजबूत एग्रीगेटर के अभाव को सबसे एक स्‍वर से महसूस किया और तय किया गया कि इस संबंध में सार्थक प्रयास किए जाने बहुत जरूरी है। फेसबुक आज एक नेटवर्किंग के महत्‍वपूर्ण साधन के तौर पर विकसित हो चुका है। इसका सर्वजनहित में उपयोग करना हम सबकी नैतिक जिम्‍मेदारी है।


सामूहिक ब्‍लॉग नुक्‍कड़ के मॉडरेटर एवं चर्चित व्‍यंग्‍यकार अविनाश वाचस्‍पति ने हिंदी ब्‍लॉगिंग को समाज की बुराईयों से बचाने और प्राइमरी कक्षाओं में इसके पाठ्यक्रम आरंभ करने को वक्‍त की जरूरत के मामले को इस अवसर पर भी दोहराया। जिसका सभी उपस्थिति ब्‍लॉगरों ने सर्वसम्‍मति से समर्थन किया।


हिंदी ब्‍लॉगर संतोष त्रिवेदी ने कहा कि बहुत ही छोटे से नोटिस पर दूर दराज से ब्‍लॉगरों का इस संगोष्‍ठी में शामिल होना साबित करता है कि हिंदी ब्‍लॉगिंग का प्रभाव शिखर की ओर तेजी से बढ़ रहा है।कंटेंट के स्‍तर पर आ रही गिरावट पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए जनसत्‍ता के संपादकीय विभाग में कार्यरत् फजल इमाम मल्लिक ने माना कि ऐसी स्थितियां तो प्रत्‍येक तकनीक के आरंभ में आती ही हैं। यह एक ऐसा मंच है जिसका पूरी जिम्‍मेदारी के साथ तभी उपयोग किया जा सकता है जबकि इस प्रकार के मेल मिलाप होते रहें। 

उन्‍होंने सबसे आवाह्न किया कि ब्‍लॉगर अपने अपने क्षेत्रों में इस प्रकार के भरसक प्रयास करें भड़ासफॉरमीडिया के मॉडरेटर यशवंत सिंह ने जानकारी दी कि आगरा में एक ब्‍लॉगर अपने तकनीक ब्‍लॉग के जरिए एक से डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह तक कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा भी कई जगहों पर ब्‍लॉगिंग से कमाई हो रही है। यह स्थिति निश्‍चय ही सुखद है। प्रत्‍यक्ष न सही, परंतु परोक्ष रूप से हिंदी ब्‍लॉगिंग से हो रही कमाई को अविनाश वाचस्‍पति ने भी स्‍वीकारा।


स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी ब्‍लॉगों के मॉडरेटर के. राधाकृष्‍णन, पी 7 से जुड़े हर्षवर्द्धन त्रिपाठी, स्‍वतंत्र पत्रकार विष्‍णु गुप्‍त, अयन प्रकाशन के भूपाल सूद, डॉ. टी. एस. दराल, हिंद युग्‍म के शैलेश भारतवासी, सुलभ सतरंगी, कुमार कार्तिकेयन, गौरव त्रिपाठी, खुशदीप सहगल इत्‍यादि ने हिंदी ब्‍लॉगिंग के स्‍वस्‍थ विकास के लिए कई पहलुओं पर उद्देश्‍यपूर्ण चिंतन किया। सबने माना कि फिजूल की अश्‍लील एवं धार्मिक उन्‍माद संबंधी पोस्‍टों पर जाने से हर संभव बचा जाए। इस दूषित प्रवृत्ति पर भी चिंता प्रकट की गई कि चार पोस्‍टें लिखकर स्‍वयं को साहित्‍यकार समझने वालों को अपनी आत्‍ममुग्‍धता से निजात पानी चाहिए। यह बुराईयां स्‍वस्‍थ ब्‍लॉगिंग के विकास के लिए हितकर नहीं हैं।

(नई दिल्ली से पवन चन्दन की रपट)

Monday, April 16, 2012

दिनेश कुमार माली की पुस्तक “ओड़िया भाषा की प्रतिनिधि कविताएं” विमोचित

तालचेर। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के बुर्ला,जागृति विहार स्थित मुख्यालय के आडिटोरियम में आयोजित कोल इंडिया स्तरीय दो दिवसीय राजभाषा सेमिनार 2012-13 ( दिनांक 11 व 12 अप्रेल ) के उदघाटन उत्सव के दौरान विगत बुधवार को एमसीएल के वरिष्ठ अधिकारी तथा लिंगराज क्षेत्र के राजभाषा अधिकारी दिनेश कुमार माली द्वारा अनूदित “ओड़िया भाषा की प्रतिनिधि कविताएं”नामक पुस्तक का विमोचन सम्पन्न हुआ । 

इस भव्य आयोजन में कोल-इंडिया की एसईसीएल,बीसीसीएल,एनसीएल,एनईसी इत्यादि अनुषंगी कंपनियों के राजभाषा अधिकारियों के अतिरिक्त देश के कोने-कोने से पधारे हिन्दी के शताधिक मूर्धन्य साहित्यकारों की उपस्थिति में श्री माली की अद्यतन पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । 

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों में एमसीएल के निदेशक ए॰के॰सिंह,बीजेबी कॉलेज भुवनेश्वर के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ शंकर लाल पुरोहित,केंद्रीय हिन्दी निदेशालय,नई दिल्ली के सलाहकार डॉ॰के॰ विजय कुमार , गंगाधर मेहेर कॉलेज सम्बलपुर के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष कीर्ति प्रकाश गुप्त ,भारत सरकार के गृह मंत्रालय की हिन्दी शिक्षण योजना,पुणे के सहायक निदेशक आर॰पी॰वर्मा व हिन्दी शिक्षण योजना,सम्बलपुर के हिन्दी प्राध्यापक डॉ हरिशचन्द्र शर्मा, केरल विश्वविद्यालय के पूर्व डीन तथा हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ वी॰पी॰कुंज मेत्तर तथा संसदीय राजभाषा समिति के पूर्व सचिव के॰के॰ ग्रोवर इत्यादि शामिल थे। 

 इस अवसर पर अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन करते हुए श्री माली को श्रीफल,शाल तथा शील्ड प्रदान कर साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। इससे पूर्व उन्हें अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन ,थाइलेण्ड में ‘सृजन-श्री’ से भी सम्मानित किया जा चुका है ।

(तालचेर से दिनेश माली की रपट)

Monday, March 5, 2012

उपन्यास "प्रेम न हाट बिकाय" का लोकार्पण संपन्न


प्रेम न हाट बिकाय (उपन्यास ) का लोकार्पण करते हुए प्रताप सहगल, साथ में डा. हरीश अरोड़ा, अविनाश वाचस्पति, राजीव रंजन प्रसाद, सुभाष नीरव, सुरेश यादव, गीता पंडित,रवीन्द्र प्रभात, शैलेश भारत वासी और अन्य .
विश्व पुस्तक मेले में दिनाक 04 .03 .2012 को सायं 5 बजे हॉल संख्या -11 में हिंद युग्म डोट कॉम के तत्वावधान में आयोजित रवीन्द्र प्रभात की सद्य प्रकाशित उपन्यास "प्रेम न हाट बिकाय" का लोकार्पण संपन्न हुआ 


समारोह में वहुचर्चित उपन्यासकार प्रताप सहगल के अलावा,वरिष्ठ ब्लॉगर और व्यंग्यकार अविनाश वाचस्पति, वेब पत्रिका साहित्य शिल्पी के संपादक राजीव रंजन प्रसाद, जनसंचार लेखन से जुड़े डा. हरीश अरोड़ा,सुभाष नीरव,सुरेश यादव,बलराम अग्रवाल,जनसत्ता के फज़ल इमाम मालिक,स्त्री विमर्श से जुडी लेखिका गीता पंडित,व्यंग्यकार निर्मल गुप्त, वन्दना, रचना क्रम के संपादक अशोक मिश्र, दैनिक जनवाणी (मेरठ) के फीचर संपादक दिलीप सिंह राणा, सुनील परोहा, उपन्यास के लेखक रवीन्द्र प्रभात और प्रकाशक शैलेश भारतवासी के साथ-साथ काफी संख्या में पाठक, दर्शक और श्रोता उपस्थित थे।

जैसे ही रवीन्द्र प्रभात अपने नवीनतम उपन्यास 'प्रेम न हाट बिकाय' के विमोचन के लिए हॉल संख्या-11 स्थित हिंद युग्म के स्टॉल पर पहुँचे, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव अपनी पत्नी मल्लिका देव के साथ आए। उन्होंने कहा कि "मेरी शुभकामना है कि हिंदी साहित्य जगत में आप उत्कर्ष हासिल करें"।


Monday, February 13, 2012

तोकियो में अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन



भारत-जापान राजनयिक संबंध स्थापना की 60वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में तोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़तोक्यो के सभागार में २८ से ३० जनवरी,१२ तक तीन-दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन हुआजिसमें जापान और भारत  के अलावा मारिशसत्रिनिदादडेनमार्कअमेरिका आदि अनेक देशों के विद्वानों एवं साहित्यकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष  प्रो.ताकेशि फुजिइ  ने आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय ने १९०८ में ही हिन्दी भाषा का शिक्षण आरम्भ कर दिया था,जब भारत के विश्वविद्यालयों में भी हिन्दी का पाठ्यक्रम शुरू नहीं हुआ था।उन्होने बताया कि अगले वर्ष से बंगला की भी पढ़ाई शुरू की जाएगी।

 मुख्य अतिथि भारतीय राजदूत श्री आलोक प्रसाद ने कहा कि यह वर्ष भारत-जापान मैत्री का हीरक जयन्ती वर्ष है,जिसकी शुरुआत इस सम्मेलन के माध्यम से हो रही है,क्योंकि विभिन्न  देशों संस्कृतियों को जोड़ने में भाषा सेतु का काम करती है।उन्होने बताया कि आज हिन्दी एक राष्ट्रभाषा के रूप में ही नहीं,विश्वभाषा के रूप में भी प्रसिद्धि पा रही है।आज  कुल १३७ देशों में हिन्दीभाषी और हिन्दीप्रेमी हैं और विश्व में सर्वाधिक बोली जानेवाली भाषा के रूप में हिन्दी का दूसरा स्थान है।उन्होने कहा कि पिछले साल जापान के प्रधान मंत्री ने भारत की सफल यात्रा की।इस वर्ष भारत के प्रधान मंत्री जापान आयेंगे।उस अवसर पर भी बड़ा समारोह होगा। उन्होने अपील की कि वर्ष भर चलनेवाले इस कार्यक्रम में सभी भाग लें।

  समारोह के विशिष्ट अतिथि थे  74 वर्षीय हिन्दी विद्वान प्रोतोशियो तनाका ने कहा कि जापानियों में भारतीय संस्कृतिभाषा और जीवन-दर्शन के प्रति स्वाभाविक अनुराग है। मै स्वयं १९५० के दशक में इलाहाबाद विश्वविद्यालय जाकर हिन्दी की विधिवत्‌ शिक्षा ली थी और तोक्यो विश्वविद्यालय में  हिन्दी के पठन-पाठन को सुव्यवस्थित  करने का प्रयास किया था।मैं महात्मा गांधी से इतना प्रभावित था कि उनके ‘हिन्द स्वराज्य’ और उनकी जीवनी को गुजराती से सीधे जापानी में अनुवाद करने के लिए मैने गुजराती सीखी।

त्रिनिदाद से आये राजनयिक श्री हंस हनुमान सिंह ने कहा कि १८४५ से १९१७ तक यूपी-बिहार के ग्रामीण गिरमिटिया मजदूर के रूप मे त्रिनिदाद अपनी भाषा-संस्कृति की पोटली लेकर गये थे । वहाँ शहरों का नमकरण भी भारतीय शहरों के नाम पर ही हुआ है।मंदिर के पुजारी हिन्दी पढ़ाते थे।गोरखपुर के गाँव से त्रिनिदाद गये पं. कपिलदेव अंग्रेजी नहीं जानते थे,जिन्दगी भर देहाती हिन्दी बोलते रहेमगर उनके ही पौत्र वी.एस. नायपाल ने अंग्रेज़ी में साहित्य लिखकर नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया।इसी तरह हरिशंकर आदेश  हिन्दी अधिकारी के रूप में कभी त्रिनिदाद गये थे,मगर आज वे वहाँ के महाकवि हैं।गर्व की बात है कि हिंदीभाषी श्रीमती कमला प्रसाद बिसेसर आज हमारे देश की प्रधानमंत्री हैं। अब वहाँ हिन्दी को विदेशी भाषा के रूप में नहीं,बल्कि राष्ट्रीय भाषा के रूप में पढ़ाने की बात उठ रही है।दुख तब होता है जब हम दिल्ली आकर भी हिन्दी नहीं सुनते।
हंगरी के बुदापेस्ट विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो.मारिया नेज्येशी ने बताया कि हंगरी में १८७३ से भारतीय विद्या के रूप में संस्कृत पढ़ायी जाती है।हिन्दी शिक्षण का कार्य वहाँ ५०-६० साल पहले शुरू हुआ।हंगरी में कुल ५०० भारतीय होंगे,मगर बीस वर्षों में दो हजार से ज्यादा लोग वहाँ हिन्दी से जुड़े ।उनमें से एक मेरी हंगरियन शिष्या आज ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हिन्दी की प्रोफ़ेसर है।हिन्दी के कारण ही मैं आज पूरी दुनिया से जुड़ी हुई हूँ।

मारिशस में विश्व हिन्दी सचिवालय के उप महासचिव श्री गंगाधरसिंह सुखलाल ‘गुलशन’ ने विदेशों में फल-फूल रहा नया भारतवंशी  समाज अपने पुरखों की थाती को सुरक्षित रखना चाहता है।जापान के विकास का भी यही कारण है कि यह आधुनिकीकरण के यूरोपीय मॉडल को नकारकर अपनी संस्कृति के अनुसार आधुनिकता को परिभाषित कर रहा है।ओसाका विश्वविद्यालय के प्रो. हरजेन्द्र चौधरी ने हिन्दी अपना  प्रचार-प्रसार अपने बल पर कर रही है। भारत से सहयोग की अपेक्षा मौन उपेक्षा ज्यादा मिल रही है।जापान  के विद्वानों ने जिस तन्मयता और समर्पण भाव से हिन्दी की सेवा की है,वह समर्पंण,वह त्याग भारत सहित किसी भी विकासशील देश के लिए प्रेरणादायक  है।

ओसाका के प्रो.तोमियो मिजोकामि ने फ़िल्मी गीतों और संवादों के माध्यम से नयी पीढ़ी को हिन्दी से जोड़ने का अपना अनुभव बताया।उन्होने ‘मुगले आज़म’ ‘मदर इंडिया’ जैसी महत्वपूर्ण फ़िल्मों के संवादों की भव्य पुस्तकें प्रकाशित कर और देश-विदेशों में अपने छात्र-छात्राओं द्वारा हिन्दी नाटकों का मंचन कर एक नया इतिहास रचा।

दैनिक ‘जनसत्ता’ के कार्यकारी सम्पादक और ‘मुअन जोदड़ो’ यात्रावृत्त के यशस्वी लेखक श्री ओम थानवी ने जापानी फ़िल्म निर्देशक कुरसोवा और सत्यजीत राय के सम्बंधों को याद करते हुए ‘अज्ञेय’ की जापान में लिखी ‘अरी ओ करुणा प्र्भामय’ और जापानी लोककथा पर आधारित लम्बी कविता ‘असाध्यवीणा’ की चर्चा की और कहा कि कैदी ‘अज्ञेय’ की जिस पहली कहानी को प्रेमचन्द और जैनेन्द्र नेजागरण’ में छापा था,उसकी एकमात्र प्रति इसी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में सुरक्षित है।डेनमार्क से पधारी डॉ.अर्चना पैन्युली ने कहा कि डेन्मार्क में जो प्रतिष्ठा पाँच करोड़ लोगों की भाषा डैनिश को मिली हुई हैवह भारत में करोड़ों की भाषा हिन्दी को नहीं।मतृभाषा को अपर्याप्त महत्व देना अस्वस्थ लोकतंत्र का परिचायक है और मानव अधिकार के खिलाफ़ है।

     सम्मेलन के कुशल संयोजक और संचालक प्रो.सुरेश रितुपर्ण ने धन्यवाद-ज्ञापन के क्रम में बताया कि जापानी छात्र-छात्राओं की भारतीय संस्कृतिवेशभूषा,खानपान के प्रति गहरी रुचि है।ये बच्चे हिन्दी  सीखकर उद्योग और वाणिज्य के क्षेत्र में दोनो देशों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। भारत में लगनेवाले उद्योगों में हिन्दी जाननेवाले जापानी युवक-युवतियों की बड़ी माँग है।भारत में अन्य विकसित देशों की भाषाओं के शिक्षण की आज भी पर्याप्त व्यवस्था नही है और प्रतिभाशाली बच्चे यदि अंग्रेज़ी सीखने के बजाय अन्य विदेशी  भाषा सीखें,तो उनके लिए रोजगार के ज्यादा अवसर हैं।

 इस अवसर पर  काव्यपाठ करने के लिए आमन्त्रित,अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित कवि डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र ने प्रारम्भ में कहा कि मैं जापान इसलिए भी आना चाहता था कि यहाँ के नागरिक जिस तरह अपने देश और देश की भाषा और संस्कृति से प्रेम करते हैंवह भारतीयों के मन में आत्मविश्वास भरने में रोल मॉडल बन सकता है। डॉ मिश्र के गीतों और मुक्तकों ने देर तक बहुदेशीय श्रोताओं को आनन्दित किया।

शाम को जापानी बच्चों ने प्रसिद्ध जापानी लोककथा ‘उराशिमातारो’ के आधार पर डॉ. रितुपर्ण द्वारा रचित नाटक प्रसन्ना’ का सफल मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया।

दूसरे दिन २९ जनवरी को ‘हिन्दी शिक्षण का वैश्विक परिदृश्य’ पर चर्चा में प्रो.तोमियो मिजोकामि(जापान)प्रो.मारिया नेज्येशी(हंगरी)डा. अर्चना पैन्यूली(देनमार्क)प्रो.सुषम बेदी(अमेरिका) ने अपने अनुभव बाँटे। ‘हिन्दी के वैश्विक प्रचार-प्रसार में हिन्दी सिनेमा और संगीत का योगदान’ विषय पर चर्चा में प्रो.तोमियो मिजोकामि(ओसाका),श्री हंस हनूमान सिंह(त्रिनिदाद)श्री ओम थानवी एवं श्री अतुल तिवारी (भारत) ने अपने विचार व्यक्त किये। तृतीय सत्र ‘नई सदी में हिन्दी का बदलता स्वरूप’ पर था,जिसकी अध्यक्षता  प्रो.सुषम बेदी(अमेरिका) ने की।इसमें भारत के डॉ.बुद्धिनाथ मिश्रश्री जगदीश उपासने,डॉ. पद्मजा शर्मा और डॉ.अमिषा अनेजा ने जीवन्त चर्चा की। शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत मुंबई के श्री शेखर सेन के कबीरतुलसी और विवेकानंद पर प्रस्तुत एकल काव्याभिनय और गायन से हुई। उसके बाद ‘ससुराल गेंदा फूल’,‘डार्लिंग’ आदि गानों से अपार लोकप्रियता हासिल करनेवाली पार्श्वगायिका रेखा विशाल भारद्वाज ने अपने गानों से लोगों को मन्त्रमुग्ध कर दिया।

      तीसरे दिन की शुरुआत ‘जापान में हिन्दी: विविध आयाम’ विषय से हुई,जिसमें प्रो. हरजेन्द्र चौधरी(ओसाका) के अलावा योइचि सुकुशिता(तोक्यो)प्रो.हिदेआकि इशिदा(साइतमा),श्रीमती मिवाको कोइजुका(ओसाका),प्रो.योशिफमि मिजुनो (तोक्यो),केइको शिराइ और प्रो.सुरेश रितुपर्ण ने जापान में हिन्दी शिक्षण की उपलब्धियों और कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की।अन्तिम सत्र ‘सूचना प्रौद्योगिकी एवं जन संचार माध्यमों मेंहिन्दी का अनुप्रयोग पर था,जिसमें श्रि आर. चन्द्रशेखर,श्री गगन शर्मा,डॉ. माधुरी सुबोध और श्री मुनीस शर्मा ने भाग लिया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि ओसाका में भारत के कौंसलाधीश एवं अंग्रेज़ी उपन्यास  ‘क्यू एंड ए’ (जिसपर ‘मिलनेयर स्लमडॉग’ बनी) के लेखक श्री विकास स्वरूप ने की। भारतीय प्रतिनिधियों की ओर से श्री ओम थानवी और विदेशी प्रतिनिधियों की ओर से श्री हंस हनूमानसिंह ने उद्गार व्यक्त किये। इस अवसर पर भारतीय संस्था ‘स्वयम्प्रभा’(देहरादून) की ओर से शाल ओढ़ाकर महामहिम विकास स्वरूपडॉ.बुद्धिनाथ मिश्र और श्री गंगाधरसिंह सुखलाल ने प्रो.ताकेइ फुजिइ को सम्मानित किया।  डॉ. रितुपर्ण ने संगोष्ठी का सार-संक्षेप प्रस्तुत किया और प्रो.ताकेशि फुजिइ ने जापान सरकार,भारत सरकार,प्रतिनिधियों और सहयोगियों के प्रति धन्यवाद-ज्ञापन करते हुए सम्मेलन को सफ़ल बनाने में भारतीय दूतावास के काउंसलर श्री टी.एन.अनंतकृष्णडिप्टी चीफ़ ऑफ़ मिशन श्री संजय पांडा,मिनिस्टर(मीडिया) श्री रवि माथुर,एयर इंडिया के मैनेजर (जापान) श्री उज्ज्वल घोष,‘स्पाइस मैजिक कलकत्ता’ के स्वामी श्री जगमोहन एवं बेला चन्द्राणीश्रीमती मधुलिका रितुपर्ण तथा हिन्दी विभाग के छात्र-छात्राओं के सक्रिय योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

(डॉ.कविता वाचक्नवी की रपट)

Wednesday, February 8, 2012

‘पत्रिका सृजनात्मक एवं पत्रकारिता पुरस्कार 2011′


राजस्थान पत्रिका समूह एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय , भोपाल की ओर से गत 22 जनवरी 2012 (रविवार) को पत्रिका मुख्यालय, केसरगढ़, जयपुर में आयोजित पं झाबरमल स्मृति व्याख्यान के अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री बी एल जोशी के हाथों ‘पत्रिका सृजनात्मक एवं पत्रकारिता पुरस्कार 2011′ हिन्दी साहित्यकारों एवं पत्रकारों को प्रदान किये गए। कहानी का प्रथम पुरस्कार जोधपुर की कथाकार डा ज़ेबा रशीद को ‘मौसम और पहली तारीख़’ पर, द्वितीय पुरस्कार दिल्ली के कथाकार सुभाष नीरव को उनकी कहानी ‘रंग बदलता मौसम’ पर, कविता मे प्रथम पुरस्कार जोधपुर के कवि/ग़ज़लकार बृजेश अम्बर को तथा द्बितीय पुरस्कार रतलाम के कवि अज़हर हाशमी को प्रदान किया गया।

इन रचनाओं का चयन वर्ष 2010 में राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार में प्रकाशित रचनाओं में से किया गया। प्रथम पुरस्कार में 11-11 हज़ार रूपये व द्बितीय पुरस्कार में 5-5 हज़ार रुपये तथा प्रशस्तिपत्र दिए गए। इस अवसर पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्य के लिए बहुत से पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। मंच पर भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू, पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी मौजूद थे। समारोह में पूर्व न्यायाधीश व भारतीय विधि आयोग के सदस्य शिव कुमार शर्मा, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य विजय शंकर व्यास, राज्य मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन के जैन, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष बी डी कल्ला, सांसद ज्ञान प्रकाश पिलानिया, जयपुर की मेयर सुश्री ज्योति खंडेलवाल, चीफ़ काज़ी खालिद उस्मानी, पंडित झाबरमल शर्मा के पौत्र व छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा सहित लगभग एक हजार के करीब साहित्य प्रेमी, पत्रकार और विशिष्ट जन उपस्थित थे।  

Monday, February 6, 2012

साहित्य,मीडिया और समाज से जुड़े सृजनधर्मियों का सम्मान

मुम्बई  मुम्बई का प्रवेश द्वार माने जाने वाले शहर कल्याण के स्थानीय लक्ष्मण देवराम सोनावणे कॉलेज वाडेघर के प्रांगण में साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था संस्कृति संगम और सृजन के तत्वावधान में आयोजित एक भव्य समारोह में वरिष्ठ हिंदी ब्लॉगर एवं साहित्यकार रवीन्द्र प्रभात को  हिंदी साहित्य श्री सम्मान-2012  से अलंकृत किया गया । उल्लेखनीय है कि श्री प्रभात के अलावा इस अवसर पर महाराष्ट्र के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता एवं कल्याण शहर जिला कॉंग्रेस के अध्यक्ष जय नारायण (मुन्ना ) पंडित को समाज गौरव पुरस्कार-2012  और मुम्बई के  अग्रणी हिंदी दैनिक हमारा  महानगर के संपादक द्विजेन्द्र तिवारी को पंडित शंभूनाथ मिश्र निर्भीक पत्रकारिता पुरस्कार -2012  से सम्मानित किया गया । उपरोक्त सम्मान के अंतर्गत सत्कार मूर्ति को श्रीफल,अंग वस्त्र,स्मृति चिन्ह और एग्यारह हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया । 

इस अवसर पर कल्याण की महापौर श्री मति वैजयंती ताई घोलप तथा सिडको के अध्यक्ष प्रमोद हिंदूराव मुख्य अतिथि रहे,जबकि विशिष्ट अतिथि रहे हिंदी अध्ययन मंडल मुम्बई विद्यापीठ के अध्यक्ष डा. एस. पी. दुबे । संस्कृति संगम के अध्यक्ष विजय नारायण पंडित ने उक्त सम्मान का प्रस्ताव किया और आगत अतिथियों का स्वागत किया सृजन संस्था के अध्यक्ष राम चन्द्र पाण्डेय । संस्कृति संगम के महामंत्री जितेन्द्र शंकर पाण्डेय ने सत्र का संचालन किया वहीँ समारोह की अध्यक्षता की सृजन सन्दर्भ के संपादक डा. सतीश पाण्डेय ने । के. एम्. अग्रवाल कॉलेज के हिंदी विभाग प्रभारी डा. मनीष कुमार मिश्र ने आभार व्यक्त किया ।   

( मुम्बई से डा. मनीष कुमार मिश्र की रपट )

ये हैं हमारे प्रथम परिकल्पना सम्मान-२०१० के सम्मानित सदस्यगण